शेख हसीना मुजीर्बुरहमान की सबसे बड़ी बेटी थीं। वह कभी सक्रिय राजनीति में नहीं आतीं, अगर 1975 में उनके पिता शेख मुजीर्बुरहमान की हत्या न की गई होती। वह अपने पति के साथ जर्मनी शिफ्ट हो चुकी थीं, मगर 49 साल पहले बांग्लादेश में जो हुआ, उसने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति में सबसे मजबूत महिला बनने के लिए मजबूर कर दिया।
बांग्लादेश की सत्ता पर पीएम के तौर पर पांच बार काबिज रहीं शेख हसीना अब ढाका छोड़ चुकी हैं। बेटे साजिब वाजेद जॉय ने ये दावा किया है कि वह अब कभी राजनीति में नहीं लौटेंगीं। अगर ऐसा होता है तो हिंसा के बाद शुरू हुई शेख हसीना की सियासी पारी का ये दुखद अंत होगा।
पिता की हत्या के बाद बांग्लादेश की सियासत में आने वाली हसीना का सफर काफी उतार चढ़ाव वाला रहा। 2007 में शेख हसीना अमेरिका गईं, वह वापस लौटतीं उससे पहले ही सत्ताधारी बीएनपी ने उनकी बांग्लादेश में एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया। 15 दिन नाटकीय घटनाक्रम के बाद यह बैन हटा, वह लौटीं और उन्हें भारी जनसमर्थन मिला। 2009 में चुनाव हुए और शेख हसीना सत्ता में लौट आईं, तब से वह बांग्लादेश की सत्ता पर लगातार राज कर रही थीं, मगर अब शायद वह कभी सियासी मैदान में नहीं दिखेंगीं।